अर्ध कुम्भ पर्व की परम्परा और महत्व

मंगलवार, फ़रवरी 09, 2016 2 Comments A+ a-

हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयाग चारो तिर्थों में बारह-बारह वर्षों में कुम्भ महा पर्व का आयोजन होता हैं, इन चार कुम्भ महापर्वो के अलावा हरिद्वार और प्रयाग में अर्ध कुम्भ पर्व मनाए जाते है, जो स्थानीय कुम्भ महा पर्व से 6 वर्ष बाद मनाते हैं, यह अर्धकुम्भ पर्व उज्जैन और नासिक में आयोजन करनें की परम्परा नहीं हैं।

सिंह राशि में बृहस्पति (गुरु) और मेष राशि में सुर्य प्रवेश करता है उस समय हरिद्वार में अर्ध कुम्भ पर्व का आयोजन होता हैं, अर्धकुम्भ पर्व में श्री गंगा जी में गंगा स्नान, जाप, पूजा, मंत्र अनुष्ठान, यज्ञ, दान आदि का विशेष महत्व माना जाता हैं।

अर्धकुम्भ पर्व प्रारम्भ होने के विषय में कई बुजुर्ग व्यक्तियों का कहना हैं कि मुगल साम्राज्य में हिन्दू धर्म पर अत्यधिक कुठाराघात होने के कारण हिन्दु धर्म की रक्षा के लिए सभी स्थानों के शांकराचायों नें मिलकर हरिद्वार और प्रयाग में सभी साधु, सन्त, महात्मा और विद्वानों को एकत्र करके उन सभी से विचार विमर्श करके अर्ध कुम्भ का आयोजन हरिद्वार और प्रयाग में प्रारम्भ किया तभी से हरिद्वार और प्रयाग में अर्ध कुम्भ पर्व का आयोजन होने लगा है, कुम्भमहा पर्व की तरह अर्ध कुम्भ पर्व भी हरिद्वार और प्रयाग मे स्नान, दान, पूजन, पाठ, जाप, यज्ञ आदि करनें का विशेष महत्व माना गया है।

अर्ध कुम्भ पर्व पर लाखों, करोड़ो की संख्या में धर्म परायण, श्रद्धालु जन स्नान, दान अौर सिद्ध सन्त, महात्मा, साधु और विद्वानों के दर्शन करते है, उनके प्रवचन सुनकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। कई संत, महात्मा और साधु और विद्वान कुछ माह पहले अर्ध कुम्भ के तीर्थ स्थल पर पहुँचकर आत्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए जाप, ध्यान, यज्ञ और तपस्या में लीन हो जाते है।

सिंह राशि में गुरू और मेष राशि में सुर्य आने से इस वर्ष 13 अप्रैल बुधवार सन 2016 ई. (चैत्र मास शुक्ल पक्ष सप्तमी) को हरिद्वार में अर्धकुम्भ पर्व का मुख्य स्नान होगा, इस दिन मेष संक्रान्ति होने के कारण भी अर्थ कुम्भ पर्व का मुख्य स्नान और स्नान, दान आदि के लिए विशेष रूप से पुण्य प्रदान करने वाला हैं।

अर्ध कुम्भ पर्व (हरिद्वार) की स्नान तिथियाँ


(1) प्रथम स्नान - 20 मार्च रवि वार 2016 ई. (फालगुन माह शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि) को महा विषुव दिवस और सायन मेष संक्रान्ति होने से प्रथम स्नान का विशेष महत्व रहेगा, अर्ध कुम्भ के स्नान दान के पुण्य लाभ अर्जित करनें का समय अरूणोदय काल (सुर्योदय से लगभग सवा घंटे पहले से सुर्योदय तक) का रहेगा, जाप, पाठ, पूजन, यज्ञ दान आदि सुर्योदय के बाद भी कर सकते है।

(2) द्वितीय स्नान - 7 अप्रेल गुरुवार 2016 ई. (चैत्र माह कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथी) को होगा,स्नान, दान का पुण्य लाभ अर्जित करने का समय अरूणोदय काल रहेगा, जाप, पूजा, पाठ, यज्ञ, दान आदि सुर्योदय के बाद भी कर सकते हैं।

(3) तृतीय स्नान - 8 अप्रेल शुक्र वार 2016 ई. ( चैत्र माह शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि) को होगा, इस दिन नव (नया) सौम्य नाम का संवत्सर (वि. 2073) और नवरात्रि प्रारम्भ होगी, स्नान, दान का पूण्य लाभ लेने कासम अरूणेादय काल रहेगा, नव संवत्सर प्रारम्भ (सनातन धर्म का नया वर्ष) होने अौर नवरात्रि प्रारम्भ होने से जाप, पूजा, पाठ, यज्ञ, दान आदि के लिए पूरा दिन पुण्य दायक रहेगा।

(4) चतुर्थ (ग्रमुख) स्नान - 13 अप्रैल बुधवार 2016 ई. (चैत्र माह शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि) को चतुर्थ स्नान वाले दिन मेष संक्रान्ति होने से संक्रान्ति का पुण्य लाभ प्राप्त करने का समय दोपहर 01/23 बजे से शुरू होगा, परन्तु प्रमुख चतुर्थ स्नान के स्नान दान आदि के पुण्य लाभ प्राप्त करने का समय प्रात: 04 / 27 05 / 57 बजे तक रहेगा, जाप, पाठ यज्ञ, पूजा दान आदि सुर्योदय के बाद भी कर सकते हैं। फिर भी प्रमुख स्नान होने से पूरा दिन स्नान दान आदि के लिए विशेष पुण्य प्रदान करने वाला रहेगा।

(5) पंचम स्नान - 14 अप्रेल गुरूवार 2016 ई. (चैत्र माह शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि) को पंचम स्नान के साथ मेष संक्रान्ति का पुण्य काल (पुण्य प्राप्त करनें का समय) 11/47 बजे तक रहने के कारण यह दिन भी गंगा स्नान अौर कुम्भ स्नान दान आदि से विशेष पुण्य लाभ कराने वाला रहेगा।

(6) षष्ठ स्नान - 17 अप्रेल रविवार 2016 ई. (चैत्र माह शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि) को होगा जिसका पुण्य लाभ अर्जित करने का समय ब्रह्म मुहुर्त से सुर्योदय तक या अरूणोदय (सुर्योदय के लगभग सवा घंटे पहले से सुर्योदय तक) काल का रहेगा। पूजा ,पाठ, यज्ञ दान आदि सुर्योदय के बाद भी कर सकते हैं।

(7) सप्तम स्नान - 22 अप्रैल रविवार 2016 ईं. (चैत्र माह शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि) को चित्रा नक्षत्र और पूर्णिमा प्रात: 7/19 बजे तक रहने के कारण यह दिन गंगा स्नान और कुम्भ पर्व स्नान मोक्ष प्रदान करने वाला हो जाएगा। स्नान दान आदि के पुण्य का लाभ प्राप्त करनें का समय प्रात: आरूणोदयकाल का रहेगा, जाप, पूजा, पाठ यज्ञ अौर दान आदि सुर्योदय के बाद भी कर सकते है। अनेक संस्थाएँ इस दिन ही कुम्भ पर्व का समापन कर देगी।

(8) अष्टम स्नान - 3 मई मंगलवार 2016 ई. (वैशाख माह कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि) को होगा। स्नान दान आदि के पुण्य लाभ प्राप्ति का समय अरूणाेंदय काल का रहेगा। जाप, पाठ, पूजा यज्ञ दान आदि सुर्योदय के बाद भी का सकते हैं।

(9) नवम (अंतिम) स्नान - 6 मई शुक्रवार 2016 ई. ( वैसाख माह कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि) को होगा। स्नान, दान आदि के पुण्य लाभ प्राप्त करने का समय अरूणोदय काल रहेगा। जाप पाठ दान आदि सुर्योदय के बाद भी कर सकते हैं।

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